रहस्यमय सफर की कहानी - story of mysterious journey
कोई कहानी ऐसी होती है जिस पर विश्वास करना तोडा मुश्किल होता है जो वास्तविक परिस्थिति से बिलकुल विपरीत होती है | यह कहानी आदित्य की जिस जीवन में ऐसी घटना बनती जो बहोत रहस्यमय है | आदित्य की माता-पिता बचपन ही मर चुके थे और वो अकेला था | उसको विरासत में बहोत सारी मिलकत मिली थी | इस लिए उसे जीवन बिताने में कोई दिक्क्त नहीं आती थी | वो अपने अकेलापन दूर करने के लिये हमेशा नई जगहों पे घूमने जाता है | उसको नई जगहों पर सफर करना बहोत पसंद था | अब उसे समुद्र में जाने की इच्छा हुई थी इस लिए वो जहाज खरीदता है और जो चीजे जरुरी है वो लेकर समुद्र की सफर के लिये निकल पड़ता है |
उसकी सफर बहोत दिन बीत जाते है लेकिन उसे कोई टापु नहीं दिखता है अचानक उसे एक टापु दिखता है | वो अपने साथ समुद्र का नकशा लाया था पर उसमे इस टापु के बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी | वो टापु की तरफ जाता है फिर जहाज को किनारे खड़ा करता है टापु पे जाता है वहा जंगल में फिरता है वहा उसे एक कुआं दिखता है वो वहा जाता है जब उसके अंदर देखता है तो उसे लगता है कोई उसे बुला रहा है | अचानक वो उसमे कूद जाता है लेकिन वो पहले था वो जगह पे आ जाता है पर वो आसपास देखता है तो वो कुआं नहीं दिखता है | आदित्य सोचता है की " में कुँए में गिरा था तो में वापस कैसे आ गया और वो कुआं भी नहीं दिख रहा है " वो वापस अपने जहाज पे जाने की सोचता है थोड़ी दूर जाता है की कोई उसे पीछे से सर पे मारता है और कुछ लोग बंदी बना लेते है जब उसकी आँख खुलती है तो आदिवासी जैसे लोग उसके आसपास थे जो अपनी भाषा में आपस में बाते कर रहे थे । आदित्य कहता की " मुझे पकड़ के क्यू लाया गया " लेकिन कोई उसकी भाषा समज नहीं पाता | तब वहा एक लड़की आती है जो आदित्य को उसकी भाषा करती है और पूछती है की " तुम कहा से आये हो " तो आदित्य जवाब देता है की " में भारत से समुद्र की सफर करते यहा आ गया हु और मेरा जहाज समुद्र के किनारे पे है |
फिर वो लड़की बोलती है की यहा तो कोई जहाज नहीं है " तो आदित्य बोला " मेने तो जहाज किनारे पे ही खड़ा किया था |
उसके बाद वो लड़की उसकी भाषा में उसके समुदाय के लोगो कुछ कहती है | जो समुदाय के नेता थे जो इस लड़की के पिता थे वो आदित्य को छोड़ ने आदेश देते है जिसके बाद आदित्य के हाथ खोल दिये जाते है उसे मुक्त कर दिया जाता | आदित्य समुद्र के किनारे की तरफ जाने लगता है तो जिस लड़की ने उसे बचाया था वो कहती है की "तुम अभी रात को वहा मत जाओ" | तो आदित्य कहता है की " क्यू ना जाऊ " तो वो लड़की जवाब देती है की " वहा अभी लिबिटी होंगे जो तुम्हे मार देंगे " आदित्य पूछता है की " लिबिटी कोन है " ? तो बोलती है की " लिबिटी आदमखोर मानव है जो हजारो साल से जमीन के अंदर रहते है जो रात को ही निकलते है क्यू की वो सूरज की रोशनी सहन नहीं कर सकते " | तो आदित्य कहता है की " ऐसे भी लोग होते है " तो बोलती है " हा होते है " आदित्य वही रुक जाता है | दूसरे दिन सुबह वो समुद्र किनारे आदित्य वो लड़की दोनों साथ जाते है | वो वहा पहुंचते है तब वो लड़की बोलती है की " अभी तक तुम्हे अपना नाम मुझे नहीं बताया तो आदित्य बोला की " मेरा नाम आदित्य है और तुम्हारा " तो वो बोली " लिसा है " फिर वो बोलती है की " तुम्हरा जहाज कही भी नहीं है " फिर आदित्य बोला " यहा तो था " उसके बाद लिसा बोलती है की " तुम्ह ४००० साल पुरानी लुप्त भाषा कैसे बोल रहे हो जो पथ्थर पे ही लिखी मिलती है | तो आदित्य कहता है की " ऐसा कैसे हो सकता है " तो लिसा बोलती है की " में तुम्हारी भाषा इस लिये जानती हु क्यू की पथ्थर पे पढ़ के सीखी है | फिर आदित्य कुछ सोचता है फिर बोलता है की " यह कौनसी साल है " तो लिसा कहती है की " ईस्वीसन ६४२२ है " यह सुन के आदित्य चकित हो जाता है फिर बोलता है की " में यहा आया था २०२० चल रहा था कही कुँए में गिरा इस लिये तो " तो लिसा कहती है " २०२० से आये हो ! तो आदित्य कहता है की " मेने तुम्हे एक बात नहीं बतायी थी की जब में यहा आया तब मेने एक कुआं देखा और मेने उसकी अंदर देखा तो पता नहीं अंदर कुद गया फिर जहा से खुदा था वही जगह वापस आ गया लेकिन कुआं नहीं था में समजा की यह मेरी कल्पना होगी " ये सुनने के बाद लिसा कहती है की " जहा तक में जानती हु की यहा कही भी कुआं नहीं है " फिर आदित्य कहता है की " में सच कह रहा हु " तो लिसा कहती है की " मुझे तुम पर विश्वास है की तुम सच बोल रहे हो |
अब आदित्य को यहा रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहता | वो यही लिसा के समुदाय में रहने लगता है कई दिन बीत जाते है अब आदित्य को उनकी भाषा भी बोल लेता है लड़ने के तरीके भी सीख लेता है | लिसा और आदित्य अब काफी एक दूसरे के साथ बनती थी दोनों जहा भी जाते थे साथ जाते और हर समय साथ रहते थे | एक रात को लिबिटी आते और समदाय के नेता के बेटे और कुछ लोग को उठा के ले जाते है " दूसरे दिन सुबह को यह बात पता चलती है सब लोग आपस में बाते करते की अब तक लिबिटी यहा नही थे अब हमें कुछ करना होगा | समुदाय के नेता कहा " लेकिन हम क्या कर सकते है " फिर लिसा बोली " पिताजी में अपने भाई को और दूसरे लोग को बचाने ने के लिये जाना चाहती हु " तो उसके पिताजी कहते है की " बेटा वहा जाने में बहोत खतरा है | " लिसा कहती है की " हमें कुछ तो करना पड़ेगा " उसके बाद उसके पिताजी कहते है की " ठीक है पर तुम अकेली नहीं जाओगी हम सब भी तुम्हारे साथ जायेगे " फिर आदित्य कहता की " में भी आपके साथ आउगा " लिसा कहती है की " ठीक है तुम्ह आना चाहते हो आ सकते हो |
फिर आदित्य , लिसा और उसके समुदाय के लोग हथियार लेकर लिबिटी जहा रहते है वहा जाते है रास्ते में जंगल में आदमखोर पेड़ जैसी कई रूकावट पार करके एक गुफा के पास पहोचते है | लिसा कहती है की " यही लिबिटी ओके पास जाने का रास्ता होगा सब गुफा में जाते है वहा बहोत अंधेरा था सब लिबिटी जहा रहते है वहा जहा जमीन के अंदर पहुंच जाते है सब छिप जाते है और उनको देखने लगते है लीबीटी कहे जाने वाले मानवो का शरीर सफ़ेद था और उनके मुह से खून टपक रहा था | सब लिआ के समुदाय के लोग अचानक हमला कर देते है | आदित्य भी उनका साथ देता है | लिसा का भाई और समुदाय के गुम हुये लोग पिंजरे में बंध थे उनको छुड़ाते है | बहोत बड़ी लड़ाई होती जिस में अंत में लिबिटी मारे जाते है सिर्फ़ लिबिटी का नेता जो शक्तिशाली होता है वो बचता है आदित्य उसके साथ लड़ता है | दोनों जहा लड़ रहे थे वहा पास में कुआं था | लिसा वहा आती है अचानक लिबिटी का नेता आदित्य धक्का देता है इतने में आदित्य उसका सर तलवार से अलग कर देता है | आदित्य कुऐ में गिरने लगता है लिसा उसका हाथ पकड़ती है और स्माइल देती है लेकिन उसका हाथ छूट जाता है जिस के बाद आदित्य कुऐ में गिर जाता |
जहा पहले था वहा पहुंच जाता है आसपास देखता तो वो कोई कुआं नहीं दिखाता है वो अब समुद्र किनारे जाता है तो जो जहाज उसने खड़ी की थी वो वही जगह पे थी फिर आदित्य अपने जहाज में चढ़ जाता | उसे उसके साथ हुई घटना की याद आती उसके आँख में आँसू थे क्यू की वो लिसा को प्यार करने लगा था और वहा से पहले आखरी बार बात भी नहीं कर पाया |
कोई कहानी ऐसी होती है जिस पर विश्वास करना तोडा मुश्किल होता है जो वास्तविक परिस्थिति से बिलकुल विपरीत होती है | यह कहानी आदित्य की जिस जीवन में ऐसी घटना बनती जो बहोत रहस्यमय है | आदित्य की माता-पिता बचपन ही मर चुके थे और वो अकेला था | उसको विरासत में बहोत सारी मिलकत मिली थी | इस लिए उसे जीवन बिताने में कोई दिक्क्त नहीं आती थी | वो अपने अकेलापन दूर करने के लिये हमेशा नई जगहों पे घूमने जाता है | उसको नई जगहों पर सफर करना बहोत पसंद था | अब उसे समुद्र में जाने की इच्छा हुई थी इस लिए वो जहाज खरीदता है और जो चीजे जरुरी है वो लेकर समुद्र की सफर के लिये निकल पड़ता है |
उसकी सफर बहोत दिन बीत जाते है लेकिन उसे कोई टापु नहीं दिखता है अचानक उसे एक टापु दिखता है | वो अपने साथ समुद्र का नकशा लाया था पर उसमे इस टापु के बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी | वो टापु की तरफ जाता है फिर जहाज को किनारे खड़ा करता है टापु पे जाता है वहा जंगल में फिरता है वहा उसे एक कुआं दिखता है वो वहा जाता है जब उसके अंदर देखता है तो उसे लगता है कोई उसे बुला रहा है | अचानक वो उसमे कूद जाता है लेकिन वो पहले था वो जगह पे आ जाता है पर वो आसपास देखता है तो वो कुआं नहीं दिखता है | आदित्य सोचता है की " में कुँए में गिरा था तो में वापस कैसे आ गया और वो कुआं भी नहीं दिख रहा है " वो वापस अपने जहाज पे जाने की सोचता है थोड़ी दूर जाता है की कोई उसे पीछे से सर पे मारता है और कुछ लोग बंदी बना लेते है जब उसकी आँख खुलती है तो आदिवासी जैसे लोग उसके आसपास थे जो अपनी भाषा में आपस में बाते कर रहे थे । आदित्य कहता की " मुझे पकड़ के क्यू लाया गया " लेकिन कोई उसकी भाषा समज नहीं पाता | तब वहा एक लड़की आती है जो आदित्य को उसकी भाषा करती है और पूछती है की " तुम कहा से आये हो " तो आदित्य जवाब देता है की " में भारत से समुद्र की सफर करते यहा आ गया हु और मेरा जहाज समुद्र के किनारे पे है |
फिर वो लड़की बोलती है की यहा तो कोई जहाज नहीं है " तो आदित्य बोला " मेने तो जहाज किनारे पे ही खड़ा किया था |
उसके बाद वो लड़की उसकी भाषा में उसके समुदाय के लोगो कुछ कहती है | जो समुदाय के नेता थे जो इस लड़की के पिता थे वो आदित्य को छोड़ ने आदेश देते है जिसके बाद आदित्य के हाथ खोल दिये जाते है उसे मुक्त कर दिया जाता | आदित्य समुद्र के किनारे की तरफ जाने लगता है तो जिस लड़की ने उसे बचाया था वो कहती है की "तुम अभी रात को वहा मत जाओ" | तो आदित्य कहता है की " क्यू ना जाऊ " तो वो लड़की जवाब देती है की " वहा अभी लिबिटी होंगे जो तुम्हे मार देंगे " आदित्य पूछता है की " लिबिटी कोन है " ? तो बोलती है की " लिबिटी आदमखोर मानव है जो हजारो साल से जमीन के अंदर रहते है जो रात को ही निकलते है क्यू की वो सूरज की रोशनी सहन नहीं कर सकते " | तो आदित्य कहता है की " ऐसे भी लोग होते है " तो बोलती है " हा होते है " आदित्य वही रुक जाता है | दूसरे दिन सुबह वो समुद्र किनारे आदित्य वो लड़की दोनों साथ जाते है | वो वहा पहुंचते है तब वो लड़की बोलती है की " अभी तक तुम्हे अपना नाम मुझे नहीं बताया तो आदित्य बोला की " मेरा नाम आदित्य है और तुम्हारा " तो वो बोली " लिसा है " फिर वो बोलती है की " तुम्हरा जहाज कही भी नहीं है " फिर आदित्य बोला " यहा तो था " उसके बाद लिसा बोलती है की " तुम्ह ४००० साल पुरानी लुप्त भाषा कैसे बोल रहे हो जो पथ्थर पे ही लिखी मिलती है | तो आदित्य कहता है की " ऐसा कैसे हो सकता है " तो लिसा बोलती है की " में तुम्हारी भाषा इस लिये जानती हु क्यू की पथ्थर पे पढ़ के सीखी है | फिर आदित्य कुछ सोचता है फिर बोलता है की " यह कौनसी साल है " तो लिसा कहती है की " ईस्वीसन ६४२२ है " यह सुन के आदित्य चकित हो जाता है फिर बोलता है की " में यहा आया था २०२० चल रहा था कही कुँए में गिरा इस लिये तो " तो लिसा कहती है " २०२० से आये हो ! तो आदित्य कहता है की " मेने तुम्हे एक बात नहीं बतायी थी की जब में यहा आया तब मेने एक कुआं देखा और मेने उसकी अंदर देखा तो पता नहीं अंदर कुद गया फिर जहा से खुदा था वही जगह वापस आ गया लेकिन कुआं नहीं था में समजा की यह मेरी कल्पना होगी " ये सुनने के बाद लिसा कहती है की " जहा तक में जानती हु की यहा कही भी कुआं नहीं है " फिर आदित्य कहता है की " में सच कह रहा हु " तो लिसा कहती है की " मुझे तुम पर विश्वास है की तुम सच बोल रहे हो |
अब आदित्य को यहा रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहता | वो यही लिसा के समुदाय में रहने लगता है कई दिन बीत जाते है अब आदित्य को उनकी भाषा भी बोल लेता है लड़ने के तरीके भी सीख लेता है | लिसा और आदित्य अब काफी एक दूसरे के साथ बनती थी दोनों जहा भी जाते थे साथ जाते और हर समय साथ रहते थे | एक रात को लिबिटी आते और समदाय के नेता के बेटे और कुछ लोग को उठा के ले जाते है " दूसरे दिन सुबह को यह बात पता चलती है सब लोग आपस में बाते करते की अब तक लिबिटी यहा नही थे अब हमें कुछ करना होगा | समुदाय के नेता कहा " लेकिन हम क्या कर सकते है " फिर लिसा बोली " पिताजी में अपने भाई को और दूसरे लोग को बचाने ने के लिये जाना चाहती हु " तो उसके पिताजी कहते है की " बेटा वहा जाने में बहोत खतरा है | " लिसा कहती है की " हमें कुछ तो करना पड़ेगा " उसके बाद उसके पिताजी कहते है की " ठीक है पर तुम अकेली नहीं जाओगी हम सब भी तुम्हारे साथ जायेगे " फिर आदित्य कहता की " में भी आपके साथ आउगा " लिसा कहती है की " ठीक है तुम्ह आना चाहते हो आ सकते हो |
फिर आदित्य , लिसा और उसके समुदाय के लोग हथियार लेकर लिबिटी जहा रहते है वहा जाते है रास्ते में जंगल में आदमखोर पेड़ जैसी कई रूकावट पार करके एक गुफा के पास पहोचते है | लिसा कहती है की " यही लिबिटी ओके पास जाने का रास्ता होगा सब गुफा में जाते है वहा बहोत अंधेरा था सब लिबिटी जहा रहते है वहा जहा जमीन के अंदर पहुंच जाते है सब छिप जाते है और उनको देखने लगते है लीबीटी कहे जाने वाले मानवो का शरीर सफ़ेद था और उनके मुह से खून टपक रहा था | सब लिआ के समुदाय के लोग अचानक हमला कर देते है | आदित्य भी उनका साथ देता है | लिसा का भाई और समुदाय के गुम हुये लोग पिंजरे में बंध थे उनको छुड़ाते है | बहोत बड़ी लड़ाई होती जिस में अंत में लिबिटी मारे जाते है सिर्फ़ लिबिटी का नेता जो शक्तिशाली होता है वो बचता है आदित्य उसके साथ लड़ता है | दोनों जहा लड़ रहे थे वहा पास में कुआं था | लिसा वहा आती है अचानक लिबिटी का नेता आदित्य धक्का देता है इतने में आदित्य उसका सर तलवार से अलग कर देता है | आदित्य कुऐ में गिरने लगता है लिसा उसका हाथ पकड़ती है और स्माइल देती है लेकिन उसका हाथ छूट जाता है जिस के बाद आदित्य कुऐ में गिर जाता |
जहा पहले था वहा पहुंच जाता है आसपास देखता तो वो कोई कुआं नहीं दिखाता है वो अब समुद्र किनारे जाता है तो जो जहाज उसने खड़ी की थी वो वही जगह पे थी फिर आदित्य अपने जहाज में चढ़ जाता | उसे उसके साथ हुई घटना की याद आती उसके आँख में आँसू थे क्यू की वो लिसा को प्यार करने लगा था और वहा से पहले आखरी बार बात भी नहीं कर पाया |

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